कन्यादान

Shaadiदान करे क्या कोई दुनिया में,

जैसा दान किया मैंने,

दिल का एक टुकरा ही दे डाला,

अहा! ये कैसा दान किया मैंने!

 

जिस बेटी को जब ठेस लगी,

एक तीस उठी मेरे दिल से!

आज दिल पर पत्थर रख कर,

उसी बेटी को दान किया मैंने,

यह कैसा दान किया मैंने!

 

बेटी क्या एक सहारा थी,

सारे घर का उजियारा थी,

आज घर में अँधियारा है,

दिये को दान किया मैंने,

यह कैसा दान किया मैंने!

 

देखो बेटा ना ठेस लगे,

कमल की कोमल कली है यह,

देखो कोई दुःख हो न इसे,

बड़े नाजों से पली है यह.

अपने गुलशन की कली तोड़,

दूजे को दान किया मैंने,

यह कैसा दान किया मैंने!

 

जो यह धुआं उठता देखा तुमने,

यह पटाखों का धुआं नहीं,

मेरे ही दिल से उठा है यह,

जो हिस्सा टूटा वोह भरा नहीं!

 

अब सुखी रहो तुम पति पत्नी,

तुमको वरदान दिया मैंने,

यह कैसा दान दिया मैंने!

यह कैसा दान किया मैंने!

 

पंडित महंत सब कहते हैं,

पापों का त्राण किया मैंने,

यह कन्यादान दिया मैंने,

यह कन्यादान दिया मैंने!